जनसत्ता सरोकार: घर की दीवारों के भीतर कैद चुप्पी, कब टूटेगा घरेलू हिंसा का सन्नाटा?

महिलाओं के लिए उनका घर-आंगन सबसे सुरक्षित स्थान होना चाहिए। परिवार और परिवेश में अपनों का संबल मिलना चाहिए। मान-सम्मान की रक्षा होनी चाहिए। दुखद…

संपादकीय: घर की चौखट तक असुरक्षित, कैसे बदलेगी महिलाओं के खिलाफ हिंसा की सोच?

समाज में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा रोकने के लिए कई कड़े कानून बनाए गए हैं, जागरूकता कार्यक्रमों के समांतर महिला सशक्तीकरण के लिए कार्यक्रम चलाए…