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संपादकीय: धार्मिक आस्था या जान का खतरा, हादसों से सबक क्यों नहीं लेता समाज?

धार्मिक स्थलों, आयोजनों, उत्सवों में भीड़ को नियंत्रित न कर पाने, आवागमन का समुचित प्रबंध न होने से अक्सर भगदड़ मचने, दम घुटने आदि से…

संपादकीय: घर की चौखट तक असुरक्षित, कैसे बदलेगी महिलाओं के खिलाफ हिंसा की सोच?

समाज में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा रोकने के लिए कई कड़े कानून बनाए गए हैं, जागरूकता कार्यक्रमों के समांतर महिला सशक्तीकरण के लिए कार्यक्रम चलाए…