बीजेपी के पूर्व नेता और यूपी सरकार में मंत्री रहे बालेश्वर त्यागी अब राजनीति से पूरी तरह दूर हो चुके हैं। लंबे समय से वह न तो किसी राजनीतिक गतिविधि में सक्रिय हैं और न ही नेताओं के बीच उठना-बैठना है। सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी उनकी मौजूदगी ना के बराबर है। इसी बीच बीजेपी कार्यालय से अचानक आया एक फोन कॉल उन्हें चौंका गया।
फेसबुक पोस्ट के जरिए बताई अपनी बात
फेसबुक पोस्ट के जरिए बालेश्वर त्यागी ने बताया कि बीजेपी के यूपी प्रदेश कार्यालय से आंबेडकर जयंती के कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता मिला। उन्होंने लिखा, “लगभग 10-12 साल बाद पार्टी के किसी दफ्तर से कोई संपर्क हुआ। मैं खुद हैरान था कि अचानक कैसे हमारी याद आ गई।” फोन करने वाला कोई कर्मचारी था, जो उनके सवालों का जवाब भी ठीक से नहीं दे सका।
बालेश्वर त्यागी ने साफ किया कि अब उन्हें राजनीति में कोई रुचि नहीं रह गई है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए कहा कि सेवा का कार्य राजनीति से भी ऊपर है। इस प्रेरणा से वे हरिश्चंद्र त्यागी सार्वजनिक पुस्तकालय और महर्षि दयानंद विद्यापीठ के प्रबंधन में जुटे हैं। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कई छात्र हर साल सिपाही से लेकर पीसीएस तक में सफल हो रहे हैं। विद्यापीठ में करीब 4000 बच्चे पढ़ रहे हैं और 130 से ज्यादा लोग इसमें काम कर रहे हैं।
त्यागी ने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि राजनीति बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, अंदर से उतनी ही जटिल और पाखंड से भरी है। नियमों का पालन करने वाले नेताओं की निंदा होती है जबकि नियम तोड़ने वालों की वाहवाही होती है। उन्होंने कहा कि अब राजनीति में न तो पहले जैसी स्वतंत्रता रही है और न ही काम करने का माहौल। विधानसभा सत्र भी साल भर में बमुश्किल 20 दिन चलते हैं, जिससे सवाल पूछने और जवाब मांगने का अवसर खत्म हो गया है।
उन्होंने स्वीकार किया कि बीजेपी भी अब वैसी नहीं रही जैसी पहले थी। पार्टी में बदलाव साफ नजर आते हैं और उन्हें अब यह सब कुछ नया सा लगता है।
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