आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब्ज और ब्लोटिंग यानी पेट फूला हुआ महसूस होना आम समस्याएं बन चुकी हैं। जिसका सबसे मुख्य कारण अनहेल्दी लाइफस्टाइल, खानपान, तनाव, कम पानी पीना और फाइबर की कमी आदि है। इन सब चीजों के चलते पेट से जुड़ी परेशानियां तेजी से बढ़ रही हैं। हालांकि, कब्ज और पेट से जुड़ी समस्या के लिए कई लोग दवाइयों, हर्बल चूर्ण और घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं, जिनसे कुछ समय के लिए तो राहत मिल जाती है, लेकिन ये राहत अस्थायी होती है। ऐसे में पेट की मालिश यानी एब्डॉमिनल मसाज एक ऐसा आसान, प्राकृतिक और असरदार उपाय है, जो न सिर्फ पाचन सुधारता है, बल्कि आंतों की गति को भी बेहतर बनाता है। कैम्ब्रिज के परफेक्ट बैलेंस क्लिनिक के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट फिल ओवेन ने कब्ज से राहत पाने के लिए पेट की मालिश के फायदे बताए हैं।
नर्सिंग अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, पेट की मालिश करने के मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं, जिससे पाचन तंत्र अच्छा होता है और कब्ज आदि की समस्या से निजात मिलती है। क्योंकि, पेट की मालिश करने से मल को ढीला करने में मदद मिलती है और कब्ज की समस्या से राहत मिलती है।
पेट की मालिश के फायदे?
पेट की हल्की-फुल्की मालिश आंतों की गति को प्रोत्साहित करती है, जिससे मल आसानी से बाहर निकल पाता है। यह कब्ज को दूर करने में लाभकारी होती है और गैस व ब्लोटिंग को भी कम करने में असरदार है। मालिश से पेट के आसपास की मांसपेशियों में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और पाचन अंगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
पाचन तंत्र अच्छा होगा
पेट की मालिश की करने से शरीर को डिटॉक्स करने और पाचन स्वास्थ्य को फायदा मिलता है। मालिश पाचन अंगों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है, जिससे खाना तेजी से और अच्छे से पचता है। यह अपच, एसिडिटी और पेट भारी लगने की समस्या में भी राहत देती है।
ब्लोटिंग और गैस से राहत
पेट की मालिश करने से ब्लोटिंग और गैस की समस्या से राहत मिल सकती है। घड़ी की दिशा में की गई मालिश पेट में जमी गैस को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे पेट की फुलावट और असहजता कम होती है।
तनाव दूर होगा
पेट की हल्की मालिश शरीर को रिलैक्स करती है और मानसिक तनाव को कम करती है। इससे नर्वस सिस्टम को भी आराम मिलता है।
कैसे करें पेट की मालिश?
पेट की मालिश सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले करना सबसे लाभकारी होता है। इसको करने के लिए एक शांत जगह पर पीठ के बल लेट जाएं और घुटनों को थोड़ा मोड़ लें। इसके बाद नारियल, तिल या कैस्टर ऑयल को हल्का गर्म करके हल्के हाथों से मालिश करें। ऐसा करने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं। नाभि के आसपास हल्के दबाव के साथ घड़ी की दिशा में सर्कुलर मोशन में मसाज करें। इससे आंतों की नेचुरल मूवमेंट अच्छी होती है। इसके साथ ही पेट के ऊपरी हिस्से से निचले हिस्से की ओर हाथ ले जाते हुए लंबवत स्ट्रोक्स भी करें। यह मल त्याग की प्रक्रिया को आसान बनाता है। हालांकि, मालिश करते हुए कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें, मालिश करते समय बहुत जोर न डालें और कम से कम 10–15 मिनट तक यह प्रक्रिया दोहराएं। ज्यादा करने पर पेट में सूजन हो सकती है।
वहीं, डायबिटीज के मरीजों के लिए चीनी का सेवन खतरनाक हो सकता है। अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि मिठास के लिए सफेद शुगर, ब्राउन शुगर और शहद किसका सेवन करना चाहिए?
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