Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti 2021: आज 19 फरवरी 2021 है। आज ही के दिन सन 1630 में बहादुर, बुद्धिमानी, शौर्यवीर छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। उनका जन्म महाराष्ट्र के शिवनेरी में मराठा परिवार में हुआ था। शिवाजी के पिता का नाम शाहजी भोंसले और मां का नाम जीजाबाई था। माता जीजाबाई धार्मिक स्वभाव वाली होते हुए भी गुण-स्वभाव और व्यवहार में वीरंगना नारी थीं। इसी कारण उन्होंने बालक शिवा का पालन-पोषण रामायण, महाभारत तथा अन्य भारतीय वीरात्माओं की उज्ज्वल कहानियां सुना और शिक्षा देकर किया था।
शिवाजी युद्ध विद्या में पारंगत थे। उन्होंने अपने विजय अभियान की शुरूआत कुछ छोटे किलों तथा बीजापुर राज्य के कुछ प्रदेशों पर विजय प्राप्त करके की। उनके बढ़ते प्रभाव से बीजापुर के राजा भयभीत हुए। शिवाजी को पकड़ने के लिए उन्होंने कई प्रयास किए लेकिन असफल रहे। अंत में उन्होने कूटनीतिक चाल चली तथा अपने सेनाध्यक्ष अफजल खान को शिवाजी के पास एक व्यक्तिगत मुलाकात के लिए भेजा। उसका उद्देश्य शिवाजी को धोखे से खत्म करना था लेकिन शिवाजी उनकी इस चाल को समझ गए। उन्होंने अफजल खान को खत्म कर दिया। इसके बाद बीजापुर की सेना को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा जिसके फलस्वरूप बीजापुर के राजा को उनसे शांति संधि करनी पड़ी।
छत्रपति शिवाजी महाराज का विवाह सन् 14 मई 1640 में सइबाई निंबालकर के साथ हुआ था। उनके पुत्र का नाम संभाजी था। संभाजी शिवाजी के ज्येष्ठ पुत्र और उत्तराधिकारी थे जिन्होंने 1680 से 1689 ई. तक राज किया। शिवाजी के समर्थ गुरु रामदास का नाम भारत के साधु-संतों व विद्वत समाज में सुविख्यात है। उनकी इस वीरता के कारण ही उन्हें एक आदर्श एवं महान राष्ट्रपुरुष के रूप में स्वीकारा जाता है। छत्रपति शिवाजी महाराज का 3 अप्रैल सन 1680 में तीन सप्ताह की बीमारी के बाद रायगढ़ में स्वर्गवास हो गया था।
जरूरी नही कि विपत्ति का सामना, दुश्मन के नजदीक रहकर ही किया जाये वीरता तो दुश्मन’ से विजय मे है। – छत्रपति शिवाजी महाराज
शत्रु को कमजोर समझना याबहुत अधिक बलवान समझना दोनों ही स्थिति घातक है। – छत्रपति शिवाजी महाराज
अगर इंसान के पास आत्मबल है,तो वो पूरी दुनिया को अपनेहौसले से हरा सकता है-छत्रपति शिवाजी महाराज
जो इंसान खराब समय मे भी पूरे मनोयोग से, अपने कार्यो मे लगा रहता है। उसके लिए समय भी खुद को बदल लेता है। – छत्रपति शिवाजी महाराज
जब आपकी मंजिल जीत हो,
तो उसे हासिल करने के लिए
चाहें कितना भी पुरुषार्थ क्यों न करना पड़े,
चाहें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी
पड़े हमेशा तैयार रहें
– छत्रपति शिवाजी महाराज
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